1983 PTI के समाज से सवाल क्या गलत हुआ इनके साथ

*1983 पीटीआई 2010 के समाज से कुछ सवाल*

 1▪️ पीटीआई भर्ती 2010 के लगे हुए किसी भी साथी के कागजों में किसी भी प्रकार की त्रुटि नहीं पाई गई यह फैसला सर्वोच्च न्यायालय का लिखित में है।
2▪️ 14 साल पहले सरकार द्वारा निकाली गई इस भर्ती में 70 %  पीटीआई 39 से 50 वर्ष की उम्र को पार कर चुके हैं, अब वह कहां जाए।
3▪️ जो बहुत ही अहम बात है लगभग 50 ऐसे साथी है जो दूसरे महकमों से रिजाइन देकर इस भर्ती में सेलेक्ट हुए अब वह कहां जाए।
4▪️ एक और महत्वपूर्ण बात 40 के करीब पीटीआई साथियों की अलग-अलग घटनाओं से मृत्यु हो चुकी है उनके परिवार का भरण पोषण उनकी एक्स ग्रेशिया के स्कीम के तहत तनख्वाह पर हो रहा है वह क्या करेंगे। वो भर्ती में कैसे शामिल होंगे और टेस्ट कैसे देंगी उन साथियों कि *विधवाएं*।
5▪️ बहुत ही संवेदनशील बात कुछ महिला पीटीआई लगने के बाद विधवा हो चुकी है आज वह सिर्फ इस नौकरी के बल पर अपने परिवार का गुजारा कर रही है वह अपना मानसिक संतुलन किसी भी लिखित परीक्षा के लिए तैयार नहीं कर सकेंगी। वह कहां जाएं।
6▪️ 1983 साथियों में से करीब 400 पीटीआई को उनकी योग्यता के अनुसार प्रमोशन दे कर सरकार द्वारा डीपीई बना दिया है, अगर यह योग्य नहीं थे तो  फिर इनको प्रमोशन क्यों दिया गया।
7▪️  एक्स सर्विस मैन कोटे में भर्ती हुए पीटीआई साथी रिटायरमेंट के बिल्कुल करीब है उनका इस प्रकार बेइज्जत कर विभाग से निकालना दुर्भाग्यपूर्ण है।
8▪️  विभाग को अपने बहुमूल्य जीवन के 10 साल देने के बाद 50 की उम्र पार कर चुके साथी अब कहां जाएं।
8▪️  *युवा खिलाड़ियों से जुड़ी हुई बात* पीटीआई 2010 के भर्ती हुए सभी साथियों का रिकॉर्ड देखेंगे तो यह गर्व होगा कि इन्होंने राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय स्तर के बहुत से खिलाड़ियों को तैयार कर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए समाज को अच्छे खिलाड़ी दिए l।
10▪️  इस भर्ती के कई कुछ साथी अपने खेल का अच्छा प्रदर्शन करके राष्ट्रीय स्तर पर कई बार मेडल लेकर शिक्षा विभाग से इंक्रीमेंट ले चुके हैं। इस तरह से उनको कलंकित करके विभाग से निकाला जाना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं सरकार से और इस सरकार को चलाने वाले ठेकेदारों से पीटीआई भर्ती 2010 के साथियों के इन 10 सवालों का जवाब चाहता हूं।

         साथ ही 1983 पीटीआई ये पूछना चाहते हैं जब कोर्ट द्वारा भी किसी भी पीटीआई में एक भी कमी नहीं निकाली गई और पूरा दोष चयन करने वाले भर्ती बोर्ड का निकाला गया तो सजा भर्ती बोर्ड को न देकर 1983 पीटीआई को क्यों दी गई।
आशा है कि समाज इन प्रश्नों का उत्तर सरकार से मंगेंगा। 

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